श्रावण की कावड़ यात्रा का न केवल आध्यात्मिक बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है !

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श्रावण की यात्रा फलदायी एवं पावन होनी के साथ स्वास्थ की दृष्टि से भी लाभदायक मानी गयी है,श्रावण की कांवड़ यात्रा का स्वास्थ्य सम्बन्धी काफी महत्त्व है . धर्म के प्रकांड विद्वानों ने इसी महत्त्व को जान कर इसको धार्मिक स्वरूप दिया है .

इस यात्रा में भक्तगण श्रद्धा पूर्वक बाबा भोलेनाथ को कांवड़ चढ़ाने के लिए पद यात्रा करते हैं .

वर्ष में 11 महीने हम दैनंदिन कार्यों एवं माया में उलझे रहते है . श्रावण मास में जब वर्षा ऋतू आरम्भ होती है तो प्रकृति में रिमझिम बरसात के साथ सर्वत्र हरियाली छा जाती है .

ऐसे सुहाने मौसम में बिना जूते चप्पल पहने कांवड़ उठा कर चतुर्दिक छाई हरियाली को निहारते हुए यात्री अपने लक्ष्य की और बढ़ते हैं .

इस दौरान उन्हें पैरों में काटों का चुभना , धूप , बरसात , गर्मी आदि को सहन करना पड़ता है . हरियाली से आँखों की रोशनी बढ़ती है . जमीन पर ओस की बूंदें पैरों को ठंडक प्रदान करती हैं . सूर्य की किरणें शरीर में प्रवेश कर उसे निरोगी बनाती हैं .

पाँव के छाले और काँटों की चुभन दर्द-कष्ट सहने की क्षमता बढ़ाते हैं . आज के विलासी जीवन जीने वाले मानव को आत्म -निरीक्षण करने का मौका मिलता है , उसको अपनी सहन-शक्ति एवं शरीर की प्रतिरोधक शक्ति का पता चलता है . उसका लक्ष्य महादेव पर जल चढ़ाना होता है , इससे इच्छाशक्ति दृढ होती है .