क्या आप मानते है की रावण को केवल प्रभु श्री राम ने पराजित किया था – लेकिन ऐसा नहीं है !

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क्या आप जानते हो की रावण को प्रभु राम के अलावा अन्य योद्धाओ के हाथो पराजित होना पढ़ा था : –

हम सब जानते है की रावण एक कुशल योद्धा और विद्वान था एक ऐसा विद्वान् जिसे अनेक शास्‍त्रों और विद्याओं का ज्ञान था। रावण को महापंडित माना जाता है जो भगवान् शिव का एक परम भक्त था. अपने जीवन में रावण ने कुछ ऐसे कार्य किये जो हर कोई नहीं कर सकता था लेकिन हम यह भी जानते है की उसकी मृत्‍यु का कारण केवल उसका अहंकार और पापकर्म थे।

वैसे तो लंका युद्ध में उसको काफी लोगो ने चुनौती दी जैसे बजरंग बलि हनुमान ने पूरी सोने की लंका को जलकर राख कर दिया और रावण कुछ न कर सका. बलि पुत्र अंगद ने भी सभा में जाकर सबको ललकारा था और तब भी रावण कुछ न कर सका लेकिन नियति में जो लिखा था उसको कौन ताल सकता था. आखिर में प्रभु श्री राम ने रावण को पराजित किया और उसका वध कर दिया.

अधिकतर लोग यही जानते हैं कि रावण को श्रीराम से हार मिली थी लेकिन आपको बता दें कि श्री राम के अलावा भी चार ऐसे योद्धा थे जिनसे रावण की पराजय हुई थी।

जी हां, रावण अपनी शक्‍तियों के अहंकार में इतना चूर था कि उसने अपने से ज्‍यादा शक्‍तिशाली योद्धाओं को युद्ध की चुनौती दी थी लेकिन इन सभी के साथ युद्ध में उसे हार का मुंह देखना पड़ा। आइए जानते हैं उन चार योद्धओं के बारे में जिनसे रावण को हारना पड़ा था –

वानर राज बालि –

बालि काफी शक्‍तिशाली था, उसकी गति को मात दे पाना अत्‍यंत मुश्किल कार्य था। एक बार रावण के युद्ध के लिए ललकारने पर बालि ने उसे अपनी भुजा में दबोच कर चार समुद्रों की परिक्रमा लगाई थी।

बालि की गति इतनी तेज थी कि वह रोज सुबह ही चारों समुद्रों की परिक्रमा करता था। रावण जैसे महान योद्धा के अत्‍यंत प्रयासों के बावजूद रावण स्‍वयं को बालि की गिरफ्त से छुड़ा नहीं पाया।

सहस्त्रबाहु अर्जुन-

एक हजार हाथ होने के कारण अर्जुन का नाम सहस्त्रबाहु अर्जुन पड़ा था। एक बार रावण, सहस्त्रबाहु से युद्ध करने अपनी पूरी सेना के साथ पहुंचा।

तब सहस्‍त्रबाहु ने अपने हजार हाथों से नर्मदा का बहाव रोक लिया और नर्मदा का जल इकट्ठा कर रावण और उसकी पूरी सेना पर छोड़ दिया जिससे रावण और उसकी सेना दोनों ही पानी में बह गए। इस प्रकार सहस्‍त्रबाहु से रावण की पराजय हुई।