माता वैष्णो के तीन पिंडियो के इस अलौकिकी रहस्य को जान आप भी हो जाओगे हैरान !

maa vaishno devi story , vaishno devi yatra , mata vaishno devi story , mata vaishno devi darshan , mata vaishno devi ke alokik rahashya ,vaishno devi darshan , vaisno devi yatra , mata vaishno devi ki kahaani , mata vaishno devi ke dwar , माँ वैष्णो देवी का मंदिर, वैष्णो देवी यात्रा, वैष्णो देवी दर्शन, माता वैष्णो देवी यात्रा, वैष्णो देवी यात्रा, माता वैष्णो देवी के दर्शन,

माता से जुड़ी एक पौराणिक कथा काफी प्रसिद्ध है जो माता के एक भक्त श्रीधर से जुड़ी है. इस कथा के अनुसार वर्तमान कटरा क़स्बे से 2 कि.मी. की दूरी पर स्थित हंसाली गांव में मां वैष्णवी के परम भक्त श्रीधर रहते थे, जो कि नि:संतान थे.  संतान ना होने का दुख उन्हें पल-पल सताता था.

इसलिए एक दिन नवरात्रि पूजन के लिए कुंवारी कन्याओं को बुलवाया. अपने भक्त को आशीर्वाद देने के लिए मां वैष्णो भी कन्या वेश में उन्हीं के बीच आ बैठीं. पूजन के बाद सभी कन्याएं तो चली गईं पर मां वैष्णों देवी वहीं रहीं और श्रीधर से बोलीं, “सबको अपने घर भंडारे का निमंत्रण दे आओ.”

श्रीधर पहले तो कुछ दुविधा में पड़ गए. एक गरीब इंसान इतने बड़े गांव को भोजन कैसे खिला सकता था. लेकिन कन्या के आश्वासन पर उसने आसपास के गांवों में भंडारे का संदेश पहुंचा दिया.

साथ ही वापस आते समय बीच रास्ते में श्रीधर ने गुरु गोरखनाथ व उनके शिष्य बाबा भैरवनाथ को भी भोजन का निमंत्रण दे दिया.

श्रीधर के इस निमंत्रण से सभी गांव वाले अचंभित थे, वे समझ नहीं पा रहे थे कि वह कौन सी कन्या है जो इतने सारे लोगों को भोजन करवाना चाहती है? लेकिन निमंत्रण के अनुसार सभी एक-एक करके श्रीधर के घर में एकत्रित हुए.

तब कन्या के स्वरूप में वहां मौजूद मां वैष्णो देवी  ने एक विचित्र पात्र से सभी को भोजन परोसना शुरू किया.

भोजन परोसते समय जब वह कन्या भैरवनाथ के समीप गई तो उन्होंने वैष्णव भोजन की जगह मास भक्षण की इच्छा जताई. माता ने जब उन्हें समझाने की कोशिश करि तो वे नहीं माने तथा उन्होंने कन्या का हाथ पकड़ लिया.

2 of 4