यदि काम धंधे में चाहिए बरकत तो एक बार अवश्य अपनाये ये उपाय !

Vyapar me vridhi ke upay, vyapar me safalta ke upay in hindi, vyapar badhane ke upay, ghar me barkat ke upay, dukan me barkat ke upay, ghar mein barkat ke upay, business me safalta ke upay, laxmi pane ke upay, व्यापर में वृद्धि के अचूक उपाय, काम में बरकत कैसे बढ़ाये, व्यापार में वृद्धि कैसे करे

Vyapar me vridhi ke upay, vyapar me safalta ke upay in hindi, vyapar badhane ke upay, ghar me barkat ke upay, dukan me barkat ke upay, ghar mein barkat ke upay, business me safalta ke upay, laxmi pane ke upay, व्यापर में वृद्धि के अचूक उपाय, काम में बरकत कैसे बढ़ाये, व्यापार में वृद्धि कैसे करे

व्यापार में वृद्धि चाहते है तो अपनाये ये उपाय : –

बरकत वह शुभ स्थिति जिसमें कोई चीज या चीजें इस मात्रा में उपलब्ध हों कि उनसे आवश्यकताओं की पूर्ति होने के बाद भी वह बची रहे अर्थात अन्न इतना हो कि घर के सदस्यों सहित अतिथि आए तो वह भी खा ले. धन इतना हो कि आवश्यकताओं की पूर्ति के बावजूद वह बचा रहे.

आओ हम जानते हैं कि बरकत बनी रहने के ऐसे कौन से अचूक उपाय हैं जिनको करने से आपके घर और आपकी जेब की बरकत बनी रहे. भरपूर रहे मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा की कृपा.

दान दें : प्रकृति का यह नियम है कि आप जितना देते हैं वह उसे दोगुना करके लौटा देती है. यदि आप धन या अन्न को पकड़कर रखेंगे तो वह छूटता जाएगा. दान में सबसे बड़ा दान है अन्नदान.

निम्नलिखित उपाय करने से घर में अन्न के भंडार भरे रहते हैं.

गाय, कुत्ते, कौवे, चींटी और पक्षी के हिस्से का भोजन निकालना जरूरी है. हिन्दू धर्म के अनुसार सबसे पहले गाय की रोटी बनाई जाती है और अंत में कुत्ते की. इस तरह सभी का हिस्सा रहता है. इस तरह के दान को पंच यज्ञ में से एक वैश्वदेवयज्ञ भी कहा जाता है. 5 यज्ञ इस प्रकार हैं- ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञ, वैश्वदेवयज्ञ, अतिथि यज्ञ.

अतिथि यज्ञ से अर्थ मेहमानों की सेवा करना व उन्हें अन्न-जल देना. अपंग, महिला, विद्यार्थी, संन्यासी, चिकित्सक और धर्म के रक्षकों की सेवा-सहायता करना ही अतिथि यज्ञ है.

अग्निहोत्र कर्म करें : हिन्दू धर्म में बताए गए मात्र 5 तरह के यज्ञों में से एक है देवयज्ञ जिसे अग्निहोत्र कर्म भी कहते हैं. इससे जहां देव ऋण चुकता होता है, वहीं अन्न और धान में बरकत बनी रहती है.

अग्निहोत्र कर्म दो तरह से होता है. पहला यह कि हम जब भी भोजन खाएं उससे पहले उसे अग्नि को अर्पित करें. अग्नि द्वारा पकाए गए अन्न पर सबसे पहला अधिकार अग्नि का ही होता है. दूसरा तरीका यज्ञ की वेदी बनाकर हवन किया जाता है.