सिर्फ बहुत जरूरत पर ही पढ़े ये मन्त्र 2 सेकेण्ड में होता है व्यक्ति वश में

शास्त्र तन्त्रसार में षटकर्म का बड़ा महत्व बताया है। षटकर्म का अर्थ है छै कर्मों का अभिचार। यह छै कर्म हैं – शांतिकर्म, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारण। मूलतः ये छै कर्म दश महाविद्या की कार्य प्रणाली का एक हिस्सा हैं तथा इन छै कर्मों को तंत्रशस्त्र में अभिचार कर्म कहा जाता है।

षटकर्म की क्रियाएं किसी भी विद्या की सिद्धि से की जा सकती है पर सभी में विधि प्रक्रियाएं अलग हैं। इन अभिचार कर्मों की सिद्धियां अलग से भी प्राप्त की जा सकती हैं। षटकर्म अत्यंत खतरनाक क्रियाएं हैं और सभी शास्त्रों में शान्ति कर्म को छोड़कर अन्य सभी को वर्जित किया है कि साधक विवेक से जनहित में या अपनी साधना-सिद्धि की सुरक्षा आदि के लिए उपयोग करें।