पहली नवरात्री में फिटकरी से करे ये काम पानी की तरह घर आयेगा पैसा

 

नवरात्र का पर्व, भारत में हिन्दू धर्म ग्रंथ एवं पुराणों के अनुसार माँ दुर्गा के विभिन्न स्वरुपो की आराधना का श्रेष्ठ समय होता है। हिन्दू पंचांग की गणना के अनुसार नवरात्री वर्ष में चार माह – चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ महीने की शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होकर नवमी तक नौ दिन के होते हैं, लेकिन लोग चैत्र और आश्विन के नवरात्र ही मुख्य रूप से मनाते है । नौ दिन और रात्रि के समावेश होने के कारन इस पर्व को (नवरात्र ) के नाम से जानते है । नवरात्रों में लोग अपनी मनोकामना सिद्ध करने के लिये अनेक प्रकार के उपवास, संयम, नियम, भजन, पूजन योग साधना आदि करते हैं। सभी नवरात्रों में माता के सभी 51 पीठों पर भक्त विशेष रुप से माता के दर्शनों के लिये एकत्रित होते हैं।

नवरात्र शब्द, नव अहोरात्रों का बोध कराता है। नव मतलब शक्ति के नौ रूप । अहोरात्रों शब्द रात्रि और सिद्धि का प्रतीक है। शास्त्रों में उपासना और सिद्धियों के लिये दिन से अधिक रात्रियों को महत्त्व दिया जाता है।

 

घट स्थापना शुभ मुहूर्त |
इस वर्ष 2017 को शारदीय नवरात्रों का आरंभ 21 सितंबर, आश्चिन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से प्रारम्भ होगा. दुर्गा पूजा का आरंभ घट स्थापना से शुरू हो जाता है अत: यह नवरात्र घट स्थापना प्रतिपदा तिथि को 21 सितंबर, के दिन की जाएगी. 21 सितंबर को सुबह 10:25 बजे तक प्रतिपदा तिथि रहेगी। रात 11:23 बजे तक हस्त नश्रत्र रहेगा। हस्त नश्रत्र और अभिजित मुहूर्त, द्विस्वभाव लग्न में कलश स्थापना शुभ मानी जाती है। अभिजित मुहूर्त सुबह 11:46 से 12:34 बजे तक रहेगा। सुबह 7:38 से 8:10 बजे तक कन्या लग्न और 12:50 से 1:42 बजे दोपहर तक धनु लग्न में कलश स्थापना (जौ बोना) अधिक शुभ रहेगा। ये समय सभी तरह से दोष मुक्त है। इसके बाद 3:16 बजे तक राहुकाल रहेगा।

आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन प्रात: स्नानादि से निवृत हो कर संकल्प किया जाता है. व्रत का संकल्प लेने के पश्चात ब्राह्मण द्वारा या स्वयं ही मिटटी की वेदी बनाकर जौ बौया जाता है. इसी वेदी पर घट स्थापित किया जाता है. घट के ऊपर कुल देवी की प्रतिमा स्थापित कर उसका पूजन किया जाता है. तथा “दुर्गा सप्तशती” का पाठ किया जाता है. पाठ पूजन के समय दीप अखंड जलता रहना चाहिए.
☆ घटस्थापना मुहूर्त -> प्रातः 06:12 से 08:09
☆ अवधि -> 1 घण्टा 56 मिनट्स

प्रतिपदा तिथि क्षय होने के कारण घटस्थापना मुहूर्त अमावस्या तिथि के दिन निर्धारित किया गया है।
☆ पहला नवरात्र, प्रथमा तिथि – 21 सितंबर 2017, दिन बृहस्पतिवार
☆ दूसरा नवरात्र, द्वितीया तिथि – 22 सितंबर 2017, दिन शुक्रवार.
☆ तीसरा नवरात्र, तृतीया तिथि – 23 सितंबर 2017, दिन शनिवार.
☆ चौथा नवरात्र, चतुर्थी तिथि – 24 सितंबर 2017, रविवार.
☆ पांचवां नवरात्र , पंचमी तिथि – 25 सितंबर 2017, सोमवार.
☆ छठा नवरात्र, षष्ठी तिथि – 26 सितंबर 2017, मंगलवार.
☆ सातवां नवरात्र, सप्तमी तिथि – 27 सितंबर 2017, बुधवार
☆ आठवां नवरात्र, अष्टमी तिथि – 28 सितंबर 2017, बृहस्पतिवार,
☆ नौवां नवरात्र, नवमी तिथि – 29 सितंबर 2017, शुक्रवार
☆ दशहरा, दशमी तिथि – 30 सितंबर 2017, शनिवार .

|नवरात्र क्यों मनाये जाते है
1. महिषासुर नामक राक्षस का वध करने के लिए नौ दिनों तक माँ दुर्गा और महिषासुर का महासंग्राम चला , अंततः महिषासुर का वध करके माँ दुर्गा महिषासुरमर्दिनी कहलाईं । तभी से हर्षो -उल्लाश के साथ Navratra Pooja का शुभारम्भ हुआ ।
2. एक दूसरी कथा के अनुसार जब राम को युद्ध में रावण को पराजित करना था । तब श्रीराम ने नौ दिनों तक ब्रत और पूजा विधि के अनुसार चंडी पूजन की और युद्ध में विजय हासिल की । अधर्म पर धर्म की इस विजय के कारण लोगो ने नवरात्र का पूजन शुरू किया था ।

| नवरात्री व्रत के दौरान क्या करें
जैसा की हम सभी जानते है की लाल रंग माँ को सर्वोपरी है । इसलिए माँ को प्रश्सन करने के लिए लाल रंग के वस्तुओ का उपयोग करे जैसे की माँ का वस्त्र,आसन ,फूल इत्यादि

सुबह और शाम दीपक प्रज्जवलित करें आरती और भजन करे । संभव हो तो वहीं बैठकर माँ का पाठ , सप्तसती और दुर्गा चालीसा पढ़े
नवरात्री में ब्रह्मचर्य का पालन करे

नवरात्र में लहशुन प्याज का उपयोग वर्जित करे
सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक उपयोग में लाये
दिन में कतई न सोये

साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखे
नवरात्री मे व्रत रखने वाले को जमीन पर सोना चाहिए।
नवरात्र के अन्तिम दिन कुवारी कन्याओ को घर बुलाकर भोजन अवश्य कराए। नव कन्याओं को नव दुर्गा रूप मान कर पुजन करे और आवभगत करे

नवरात्री के दिनों मे हर एक व्यक्ति खासकर व्रतधारी को क्रोध, मोह, लोभ आदि दुष्प्रवृत्तियों का त्याग करना चाहिए।
अष्टमी-नवमीं पर विधि विधान से कंजक पूजन करें और उनसे आशीर्वाद जरूर लें।
नवरात्रे के आखिरी दिन पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से माँ की विदाई यानि की विसर्जन कर दे

| नवरात्री व्रत के दौरान क्या नहीं करें
दाढ़ी-मूंछ, और बाल नहीं कटवाने चाहिए
अखंड ज्योति जलाने वालों को नौ दिनों तक अपना घर खाली नहीं छोड़ना चाहिए
पूजा के दौरान किसी भी तरह के बेल्ट, चप्पल-जूते या फिर चमड़े की बनी चीजें नहीं पहननी चाहिए
काला रंग का कपड़ा वर्जित करे क्योंकि यह रंग शुभ नहीं माना जाता है

मॉस, मछली , उत्त्जेक पदार्थ जैसे शराब ,गुटखा और सिगरेट का सेवन नहीं करना चाहिए
किसी का दिल दुखाना , झूट बोलने से बचे
नौ दिन तक व्रत रखने वाले को अश्थियों (मुर्दो) शव के पास नहीं जाना चाहिए
शारीरक संबध बनाने से बचे