कल की एकादशी इस तरह जला दे 2 इलायची अपार धन की होगी प्राप्ति

हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मा एकादशी कहते है। मान्यता है कि इस दिन आषाढ़ मास से शेष शैय्या पर सोए भगवान विष्णुजी करवट बदलते हैं।

इस दिन भगवान विष्णु और उनके अवतार वामन रूप की पूजा की जाती है। इस बार पद्मा एकादशी व्रत 02 सितम्बर को है।

पद्मा एकादशी व्रत वाले दिन भगवान विष्णु के वामन अवतार का धूप, तुलसी के पत्तों, दीप, नेवैद्ध व फूल आदि से पूजा करने का विधान है। इस दिन सात घड़ों को अलग-अलग अनाजों (गेहूं, उडद, मूंग, चना, जौं, चावल और मसूर) से भरकर रखा जाता है।

कहा जाता है कि पद्मा एकादशी से एक दिन पहले गेहूं, उडद, मूंग, चना, जौं, चावल तथा मसूर नहीं खानी चाहिए।

स्थापित किए हुए घड़े के ऊपर भगवान विष्णु की मूर्ति रखकर पूजा करने का विधान है। पद्मा एकादशी व्रत वाली रात को भगवान का भजन गाकर जागरण करना चाहिए।

पद्मा पुराण के अनुसार व्रत अगले दिन भगवान का पूजन कर ब्राह्मण को भोजन और दान देने का विधान बताया गया है। अंत में भोजन ग्रहण कर व्रत खोलना चाहिए।

कहा जाता है कि पद्मा एकादशी व्रत करने से साधक के सभी पापों का नाश तथा सभी भोग वस्तुओं की प्राप्ति होती है।