chadakya niti-अगर चाणक्य इन पांच प्रश्नों के उत्तर है आपके पास कोई नहीं रोक सकता… !

कोई नहीं रोक सकता आपको सफल बनने से :-

हम में से कोई लोग ऐसे होते है जो अपनी पूरी जिंदगी ईमानदारी से मेहनत करते है, वे धन की व सुख की तालश में अपनी पूरी जिंदगी निकल देते है परन्तु इतना सब कुछ करने के बावजूद भी वह अपने मेहनत के अनुसार परिणाम नहीं प्राप्त कर पाते.

और वही कुछ लोग ऐसे भी होते है जिन्हें बगेर कुछ किया मनचाहा फल प्राप्त हो जाता है. असफलता एक ऐसी चीज़ है जो मनुष्य को सफल बनाने की पहली सीधी होती है. परन्तु यह स्वभाविक है की असफलता से मनुष्य डरता है.

महान नीतिकार चाणक्य ने इस सम्बन्ध में अपने अनेक मत रखे है जिनमे से पांच प्रमुख नीति हम आपको बताने जा रहे है. ये नीतिया निश्चित रूप से मानव की सफलता के प्रतिशत को कई गुना बढा देगा.

सफलता प्राप्ति की पहली नीति :-

आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को अपने आप से अक्सर ये प्रश्न पूछना चाहिए की अभी उसका कैसा वक्त चल रहा है. उसे अपने हालातो को देख कर ही किसी कार्य को आरम्भ करना चाहिए जिसके बारे में वह विचार कर रहा है. अपने चल रहे समय को देखकर लिए गए निर्णय से मनुष्य कभी पछताता नहीं है.

सुख के समय में तो हर कोई अपना समय व्यतीत कर लेता है परन्तु दुःख के समय व्यक्ति को हर एक दिन कई वर्ष लगने लगते है.

यदि कोई व्यक्ति दुःख में भी धैर्य न खोये तथा अपने कार्य में फोकस रखते हुए निरन्तर बढ़ता रहे है तो यह निश्चित है की एक न एक दिन उसे सफलता प्राप्त हो ही जाएगी.

 

परन्तु यदि वह धैर्य खोता है तो उसका जीवन निरथर्क हो सकता है वह अपने हाथ में आये अवसर को खो देता है.

सफलता प्राप्ति की दूसरी नीति :-

सफलता प्राप्ति से जुडी चाणक्य की दूसरी नीति कहती है की अपने आप में ऐसा गुण विकसित करो की तुम आसानी से पहचान सको की तुम हमारा वास्तविक मित्र कौन है तथा मित्र के रूप में छुपा शत्रु कौन है. हम यदि यह पहचान गए की कौन हमारा शत्रु है और कौन हमारा मित्र उस दिन आधी सफलता हमारे कदमो में होगी.

केवल सच्चे मित्र ही व्यक्ति को सफलता के रस्ते तक पहुचते है. यदि आप अपने मित्र के रूप में शत्रु के साथ हो तो आपकी सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा.

सफलता की तीसरी नीति :-

समझदार इंसान वह है जो अपनी आय का हिसाब किताब रखता है. व्यक्ति को अपनी आय को देखकर ही व्यय करना चाहिए क्योकि जो लोग आय से अधिक खर्च करते हैं, वे परेशानियों में अवश्य फंसते हैं.

अत: धन संबंधी सुख पाने के लिए कभी आय से अधिक व्यय नहीं करना चाहिए. आय से कम खर्च करेंगे तो थोड़ा-थोड़ा ही सही पर धन संचय हो सकता है.

सफलता की चौथी नीति :-

अपने आप से प्रश्न करे की ये देश कैसा है यानी जहां हम काम करते हैं, वो स्थान, शहर और वहां के हालात कैसे हैं. कार्यस्थल पर काम करने वाले लोग कैसे हैं. इन बातों का ध्यान रखते हुए काम करेंगे तो असफल होने की संभावनाएं बहुत कम हो जाएंगी.