bhoot-ghar me bhoot hone ke lakshan|ये वस्तु से होगा घर मे भूतो का वास

ghar me bhoot hone ke lakshan

आज के इस आधुनिक युग में लोग प्राचीन परम्पराओ को बेतुका मान उनसे मुंह मोड़ रह है. आज के लोगो का मानना है की इन परम्पराओ का कोई आधार नहीं है अगर यह परम्परा बनी भी थी तो वह उसी जमाने के लिए अनुकूल थी.(ghar me bhoot hone ke lakshan).इस आधुनिक युग में प्राचीन मान्यताएं सिर्फ एक बात बन कर रह गई जिसका कोई मतलब नहीं. इनका इस युग में कोई भी उपयोग नहीं यदि कोई व्यक्ति इन मान्यताओं को मान भी रहा है तो वह सिर्फ अपना नुकसान कर रहा है और व्यर्थ की चीज़ो में अपना समय गंवा रहा है.

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यदि आप का भी कुछ इसी प्रकार का नजरिया है तो आज हम आपको एक सच से वाकिफ कराएंगे जो आपके नजरिए को बदल देगा.

वास्तव में अनेक प्रकार के शोधों के बाद एवं हमारे प्राचीन मान्यताओं को गहराई से समझने के बाद शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष दिया है की अक्सर हर हिन्दू मान्यताओं के पीछे एक वैज्ञानिक सन्देश छुपा हुआ है.

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हर एक मान्यताओं से जुदा एक वैज्ञानिक कारण है, जिनके बारे में हर कोई नहीं जानता.

यह सत्य है की जब ये मान्यताएं बनी थी उस युग में उन्हें प्रयोग में लाना बहुत ही आसान था तथा यह सही भी था. परन्तु आज के युग में बहुत बदलाव आ चुका है अनेक परिवर्तन हो चुके है.

लेकिन फिर भी मान्यताओं के वैज्ञानिक परिणाम आज भी वैसे के वैसे ही है, उनमे कोई बदलाव नहीं आया है. तथा यदि इन्हे भली भांति समझा जाए तो ये काम में लिए जा सकते है.

आटा क्यों नहीं रखना चाहिए फ्रिज में :-ghar me bhoot hone ke lakshan

फ्रिज में रखा आटा आपका कुछ समय तो बचा सकता है परन्तु क्या आप जानते है की इसके साथ ही यह आपके घर में भुत प्रेतों को भी आमंत्रित कर रहा है.

शास्त्रों के अनुसार(ghar me bhoot hone ke lakshan) फ्रीज़  में रखा आटा उस पिंड के समान माना गया है जो मृत्यु के बाद मृतात्मा के लिए रखे जाते है.

यदि आप आटा गूथ कर फ्रिज में रख देते है तो प्रेतात्मा उस आटे का भक्षण करने के लिए आपके घर में आते है.

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जिन आत्माओं के पूर्व जन्म में संतान न होने के कारण अथवा किसी अन्य कारण से उनके मृत्यु के पश्चात पिंडदान नहीं हो पाता वे अपनी तृप्ति के लिए इन फ्रिज में रखे आटा का प्रयोग अपने तृप्ति के लिए करतीं है.

जिस किसी परिवार में भी ऐसी आदत होती है वहां अनिष्ट रोग, किसी प्रकार की समस्या का लगा रहना, क्रोध, किसी भी कार्य की शुरुवात करने के बाद उसमे मन न लगाना तथा आलस्य जैसे दुलक्षणो का डेरा हो जाता है.

शास्त्रों के अनुसार(ghar me bhoot hone ke lakshan) यह कहा गया है की बासी भोजन भुत भोजन होता है, तथा इसे जीवन में गर्हण करने वाल व्यक्ति सदैव परेशानियों एवं बीमारियों से घिरा रहता है.

लेकिन इसका वैज्ञानिक रूप देखा जाए तो पहले से पका हुआ खाना या काफी घंटों पहले गूंथा गया आटा जब फ्रिज से निकाला जाता है तो वह फ्रिज की ठंडक में रखने के बावजूद भी बासा ही हो जाता है.

ऐसे आटे से बनी रोटी खाना सेहत के लिए अच्छा नहीं होता.ऐसे में छोटे-छोटे रोग हो जाना परिवार के सदस्यों के लिए सामान्य बात हो जाती है.

लेकिन कुछ मान्यताएं ऐसी थी जो केवल क्षेत्रीय थी जिनका आज के युग में कोई प्रयोग नहीं जैसे नाख़ून काटने की परम्पराएं, पहले यह मान्यताएं थी की शाम के समय अथवा घर के भीतर नाख़ून नहीं काटने चाहिए.

परन्तु इस मान्यता का वास्तविक रहस्य यह था की पुराने समय में लाइट का अविष्कार नहीं था ऐसे में शाम के समय अथवा घर के भीतर नाख़ून काटते समय हाथ कटने का ख़तरा था.

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शाम को झाड़ू नहीं लगाना चाहिए :- प्राचीन समय में झाड़ू को लेकर भी अनेक मान्यताएं थी जैसे शाम के समय झाड़ू नहीं लगाना चाहिए यदि ऐसा किया जाये तो घर से लक्ष्मी रूठ जाती है अथवा घर में आर्थिक तंगी आती है.

इस मान्यता का वास्तविक कारण था की काम रौशनी होने के कारण घर की सफाई ढंग से नहीं हो पाती थी और इसके साथ यदि शाम के समय सफाई की जाए तो अनेक मूलयवान चीज़े भी कूड़े में जाने का खतरा था.

इसके अलावा यह भी मान्यता थी की झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखना चाहिए. यदि इस मान्यता की और गौर किया जाए तो इस मान्यता के पीछा छुपा मुख्य कारण था की यदि झाड़ू को खड़ा रखा जाए तो यह संतुलन बिगड़ने में किसी पर गिर भी सकता है और किसी को इससे ठोकर खा के चोट लग सकती है.