Govardhan Pooja

Govardhan Pooja- How to do Govardhan Puja at home & Timings

Govardhan Pooja

गोवर्धन की पूजा या अन्नकूट या दूसरे शब्दों में वह भोजन जो पर्वत राज गोवर्धन को दिया जाता है । हिन्दू धर्म में लोग इस दिन 56 प्रकार के भोजन बनाते हैं। जो गोवर्धन राज को Govardhan Pooja में चढ़ाया जाता है।

Govardhan poja manane ka kaaran

भागवत पुराण के अनुसार, इस दिन परमपुरुष परमेश्वर श्री कृष्ण भगवान् ने गोलकुल वासियों की रक्षा इंद्रा के कोप से की थी। कृष्णा भगवान् ने अपने ऊँगली पर गोवर्धन उठाया था। उसी दिन से यह गोवर्धन पूजा के नाम से जाना जाता है।

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Why Govardhan Puja is celebrated after Diwali?

गोवर्धन की पूजा धन, समृद्धि और भाग्य लाती है। गाय की पूजा हमारे पूर्वजों के पापों को शुद्ध करती है। गोवर्धन पूजा हिन्दू धर्म में मनाया जाने वाला पवित्र त्यौहार है।

Govardhan Puja kyo manate hain

ऐसा नहीं है की गोवर्धन पूजा दिवाली के बाद मनाया जाता है। यह हर साल कार्तिक महीने के हिन्दू कैलेंडर में शुकल पक्ष में मनाया जाता है, जो दिवाली के बाद ही आता है।

What is the Meaning of Govardhan ?

गोवर्धन का मतलब बहुत ही सीधा एवं सरल है। जब श्री कृष्णा ने गोकुल वासियों की रक्षा करने के लिए इंद्रा के प्रकोप से गोवर्धन उठया था, तब ही से इसका नाम गोवर्धन हुआ है। तब ही से Govardhan Pooja मनाई जाती है

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Govardhan pooja story

गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन गोऊ माता की पूजा की जाती है। इस दिन गौऊ पूजा का बहुत ही विशेष महत्व होता है। आप इस दिन यदि जो भी गोऊ के लालन पोषण करने वालों को अन्न एवम वस्त्रों का दान करते हैं, उनके घर में सुख और समृद्धि आती है।

Govardhan Pooja 2018

गोवर्धन पूजा कथा के अनुसार, एक बार जब श्री भगवान् परमपुरुष परमेश्वर ने अपनी एक ऊँगली पर गोवर्धन उठाया था। जो की इंद्रा का अभिमान चूर्ण करने के किया था। श्री कृष्णा भगवान् ने  इंद्रा के कोप से गोकुल वासियों की रक्षा करने के लिए गोवर्धन को उठाया था।इसीलिए Govardhan Pooja मनाई जाती है।

Govardhan Pooja Katha

जब इंद्र का घमंड का चूर्ण हो गया था, श्री कृष्णा ने कहा था की कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन जो भी 56 भोग बनाकर गोवर्धन पर्वत की पूजा करेगा उसे सुख समृद्धि मिलेगी।

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गोवर्धन पूजा के दिन अन्नकूट बनाकर भगवान् श्री कृष्णा परमेश्वर की पूजा तथा गोवर्धन पूजा की जाती है। जब श्री कृष्णा ने गोकुल वासियों की इंद्र के कोप से रक्षा की तब गोकुल वासियों ने कृष्णा को 56  भोग बनाकर दिया था। जिससे श्री कृष्णा ने गोकुलवासियों को आशीर्वाद दिया और उनकी रक्षा की।

 

Govardhan Puja 2018: How to do Govardhan Puja at home & Timings

गोवर्धन पूजा प्रातःकाल मुहूर्त- 06:39 से 08:52

गोवर्धन पूजा Pratahkal Muhurat = 06:39 to 08:52

अवधि- 2 घंटे 12 मिनट

Duration = 2 Hours 12 Mins

गोवर्धन पूजा सायंकाल मुहूर्त – 15:28 से 17:41

Govardhan Puja Sayankal Muhurat = 15:28 to 17:41

Duration = 2 Hours 12 Mins

अवधि- 2 घंटे 12 मिनट

 

what is govardhan puja time

Pratipada Tithi Begins = 21:31 on 7/Nov/2018

प्रतिपदा तिथि प्रारम्भ – 21:31 पर 7/Nov/2018
Pratipada Tithi Ends = 21:07 on 8/Nov/2018

प्रतिपदा तिथि समापन- 21:07 पर 8/Nov/2018

What do we do in Govardhan Puja?

गोवर्धन पूजा हिन्दू धर्म में पवित्र पर्व है। जो बड़े ही धूम धाम से दिवाली के बाद मनाया जाता है। हिन्दू धर्म  के अनुसार लोग घर के आँगन में गोबर से गोवर्धन नाथ की अल्पना बनाकर पूजा करते हैं।

Govardhan pooja kis prakar karen

इन सब  प्रक्रिया के बाद गिरिराज पर्वत भगवान् की पूजा की जाती है। एवम अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।

  • आप इस दिन सुबह 4:45 बजे ब्रह्म मुहूर्त में उठकर अपने दैनिक कार्यों से निवृत होवें और स्नान करें।

How is Govardhan Puja celebrated?

  • तत्पश्चात स्वच्छ वेश धारण कर अपने भगवान् इष्ट का ध्यान करें।
  • एवम अपने घर के आँगन में गाय के गोबर से गोवर्धन बनाएं।
  • उसके बाद आप उस गोवर्धन किसी वृक्ष की भाँती उस पर पत्ते शाखा एवम फूल आदि से श्रींगारित करें।

What is Annakut on Diwali?

श्री कृष्णा भगवान् ने गोकुल वासियों की रक्षा इंद्रा के प्रकोप से की और गोवर्धन धारण किया था। तत्पचात गोकुल वासियों ने श्री कृष्ण को विभिन्न प्रकार के 56 भोग खिलाये। श्री कृष्ण भगवान् के आदेशानुसार उस दिन से गोकुल वासी गोवर्धन पर्वत की पूजा तथा उन्हें 56  प्रकार के भोग भी अर्पित करते हैं। जो अब अन्नकूट के नाम से सुविख्यात है। तथा इसे गोवर्धन पूजा के नाम से भी जाना जाता है

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Govardhan Puja Vidhi

आप ध्यान रखे आपको पूजा नियम विधि के अनुसार करे जहाँ पर आपको पूजा आरती भी करनी होगी, जो इस प्रकार हैं।

।। श्री गोवर्धन महाराज जी की आरती ।।

श्री गोवर्धन महाराज, ओ महाराज ।

तेरे माथे मुकुट विराज रहेओ ॥

तोपे पान चढ़े, तोपे फूल चढ़े ।

तोपे चढ़े दूध की धार, ओ धार ॥

तेरे माथे मुकुट…

तेरी सात कोस की परिकम्मा ।

चकलेश्वर है विश्राम, ओ विश्राम ॥

तेरे माथे मुकुट…

तेरे गले में कंठा साज रेहेओ ।

ठोड़ी पे हीरा लाल, ओ लाल ॥

तेरे माथे मुकुट…

तेरे कानन कुंडल चमक रहेओ ।

तेरी झांकी बनी विशाल, ओ विशाल ॥

तेरे माथे मुकुट…

।। गिरिराज धरण प्रभु तेरी शरण ।।

  • पूजा के दौरान आरती के बाद गायों को स्नान कराएं ।
  • उसके पश्चात गायों को मेहंदी माला अन्य अलंकारों से श्रगारित करें। उनका आप पुष्प, अक्षत से पूजन करें ।