kailash mansarovar yatra 2017 – कैलाश मानसरोवर यात्रा 2017

kailash mansarovar yatra 2017 कैलाश मानसरोवर यात्रा 2017

आज हम आपको हिन्दू सनातम धर्म के kailash mansarovar yatra 2017 पांच उन पवित्र एवम पुण्यदायी सरोवर के बारे में बताने जा रहे जहा हर किसी को अपने जीवन में एक बार अवश्य जाना चाहिए. इतिहास में इन सरोवरों का बहुत महत्व माना गया है.

कैलाश मानसरोवर :-

हिन्दू धर्म kailash mansarovar yatra 2017 के अनुसार कैलाश मानसरोवर वह स्थल बतलाया गया है जहां देवी पार्वती स्नान करती है. धर्म ग्रंथो में यह वर्णित है की इस मानसरोवर का निर्माण सृष्टि रचना का समय ब्रह्मा जी ने अपने मन द्वारा किया था.

इस सरोवसर से कुछ दुरी पर ही कैलाश पर्वत है, जो भगवान kailash mansarovar yatra 2017 शिव का निवास स्थान है. कहा जाता है की कैलाश पर्वत में आप अलौकिक शक्तियों को महसूस कर सकते है अनेक बोद्ध धर्म के अनुयाइयो ने इस बात की पुष्टि करी है.

तथा स्वयं  बोद्ध धर्म में इस स्थान को पवित्र बतलाया गया है.

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नरायण सरोवर :-

गुजरात के कक्ष जिले के लखपत तहसील में स्थित kailash mansarovar yatra 2017 यह सरोवर भगवान का विष्‍णु का सरोवर माना जाता है.  भागवत पुराण में इस सरोवर की चर्चा है और यहां पर कई प्राचीन ऋषियों के आने के प्रसंग मिलते हैं.

इस सरोवर को लेकर यह भी मान्यता है की जो भी व्यक्ति kailash mansarovar yatra 2017 इस सरोवर में स्नान करता है उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है.

पम्पा सरोवर :- 

मैसूर के कंपी के निकट बसे अलेगुंदी kailash mansarovar yatra 2017 गांव को रामायण कालीन किष्किधां माना जाता है.  यहां से कुछ दूर आगे जाने पर पहाड़ों में कुछ जीर्णशीर्ण मंदिर और गुफाएं मिलती हैं जिनमें से एक सबरी गुफा है.

कहा जाता है कि भगवान राम यहीं पर सबरी kailash mansarovar yatra 2017 से मिले थे.  यहीं पर सबरी के गुरु मतंग रिषि के नामका एक वन भी है.

पुष्कर सरोवर :-

पुष्कर सरोवर राजस्थान में स्थित है, यह पवित्र सरोवर kailash mansarovar yatra 2017 राजस्थान में अजमेर से केवल 14 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है. कहा जाता है की यहां स्वयं ब्रह्मा जी ने आकर यज्ञ किया था. ऋषि विश्वामित्र ने भी यहां एक बार आकर यज्ञ किया था.

एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान श्री राम ने अपने kailash mansarovar yatra 2017 पिता दशरथ का श्राद इसी सरोवर पर किया था.

बिंदु सरोवर :-

कई वर्षो पूर्व यह स्थान महृषि कर्दम का निवास स्थल kailash mansarovar yatra 2017 था, यही वे अपने आश्रम में ईश्वर की साधना किया करते थे. कहा जाता है की ऋषि कर्दम ने यहां पर लगातार 10 हजार वर्षो तक की कठिन तपस्या करी थी.

यह पवित्र सरोवर अहमदाबाद से 130 किलो मीटर kailash mansarovar yatra 2017 की दुरी पर स्थित है. इस स्थल का वर्णन ऋगवेद में भी मिलता है.

भगवान विष्णु के अवतार परशुराम ने अपनी माता का श्राद्ध इसी सरोवर में kailash mansarovar yatra 2017 किया था.

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