kanwar yatra-श्रावण की कावड़ यात्रा का न केवल आध्यात्मिक बल्कि वैज्ञानिक महत्व भी है !

इस धार्मिक उत्सव की विशेषता यह है कि सभी कांवड़ यात्री केसरिया रंग के वस्त्र धारण करते हैं और बच्चे, बूढ़े, जवान, स्त्री, पुरुष सबको एक ही भाषा में बोल-बम के नारे से संबोधित करते हैं.

केसरिया रंग जीवन में ओज , साहस, आस्था और गतिशीलता का प्रतीक है इसके अतिरिक्त कलर-थेरेपी के अनुसार केसरिया रंग पेट से सम्बंधित रोगों को भी दूर करता है .

यात्री गण एक दूसरे से अंतःक्रिया करते हैं इससे सामाजिकता बढ़ती है .

बैजनाथधाम (झारखंड प्रांत) रावणेश्वर लिंग के रूप में स्थापित है. श्रावण मास तथा भाद्रपद मास में लाखों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा करके इनका जलाभिषेक करते हैं.आगरा जिले के पास बटेश्वर में, जिन्हें ब्रह्मलालजी महाराज के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिवजी का शिवलिंग रूप के साथ-साथ पार्वती, गणेश का मूर्ति रूप भी है.

श्रावण मास में कासगंज से गंगाजी का जल भरकर लाखों की संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का कांवड़ यात्रा के माध्यम से अभिषेक करते हैं.