shani dev ko prasann karne ke uttam upay- शनिदेव को प्रसन्न कंरने के उतम उपाय शनिदेव की ऐसे करें पूजा, होगी धन-धान्य में वृद्धि| shani shanti

Shani Shanti 

Shani shanti बहुत जरुरी है। शनिदेव को वृद्धावस्था का स्वामी भी कहा जाता है वृद्ध जनों की सेवा से शनि देव अत्यंत्र प्रसन्न होते हैं ज्यादार देखा गया है की वृद्धावस्था में मनुष्य काम वासनाओं से अलग होकर देवत्व को प्राप्त होता है इसीलिए अपने परिवार में वृद्धों का सम्मान के साथ- साथ सेवा करनी चाहिए।

 

  • शनि देव दरिद्रनारायण के नाम से भी पहचाने जाते हैं इसलिए अपनी कमाई का लगभग 10 % हिस्सा दान मे खर्च करना चाहिए जिससे की शनिदेव खुश होते है अगर आप गरीबो व् दीन- दुखियो की सेवा करते है तो शनिदेव महाराज आपसे हमेशा प्रसन रहते है।
  • अपनों से छोटे व् कमजोर लोगो से विनम्र व्यवहार से आर्शीवाद मिलता है और तरक्की के रास्ते बनते है ।
    अगर आप ज़रूरतमंद को काला छाता, चमड़े के जूते-चप्पल दान करते हो हो इस से शनिदेव प्रशन्न होते है।
  • शनिवार को भगवान शनि देव को उड़द दाल के लड्डू या गुड और चने के लड्डू का भोग लगाकर गरीबो मे बांटने से भी रुष्ट शनि शांत रहते हैं।
  • हरेक शनिवार को तेल मालिश के बाद स्नान करने से शनि साढ़े साती के बुरे प्रभावों से भी बचा जा सकता है ।
  • निष्ट शनि को शांत करने के लिए शनिवार के दिन काले वस्त्र या वस्तुएं , चमड़े से बनी वस्तुएं , लोहे का सामान सरसों का तेल आदि दान किसी गरीब या निर्बल या असाध्य व्यक्ति को करना चाहिए ।

  • तरल पदार्थ जैसे -तेल और शराब को शनि का कारक माना गया है इसीलिए शनि के प्रकोप से बचने के लिए तेल का दान करना चाहिए और शराब से दूर रहना चाहिए।
  •  अपने साथ काम करने वाले कर्मचारियों,नौकरों, वृद्ध , निसंतान,ज्योतिषी , पुजारी अदि को कभी भी परेशान नहीं करना चाहिए बल्कि जितना हो सके ऐसे लोगो की मदद करे जितना हो सके आपसे shani shanti  के लिए इनको हमेशा उचित दान देकर खुश रखे ।
  • शुभ फलो की प्राप्ति के लिए  व् शनिदोष निवारण के लिए “शनि स्तोत्र” का पाठ कीजिये ।
  • शनि के प्रकोप से बचने के लिए भगवान् शिव और हनुमान जी की नियमित रूप से पूजा करे।
  • अगर आपको शनि की वजह से शारीरिक बीमारिया से रही है तो उसके निवारण के लिए “महामृत्युंजय जप” का जाप करवाए।
  • हनुमान चालीसा का नियमित रूप से निरंतर पाठ करे।

 

 

  • अगर आप शनिदेव के साथ-साथ काल भैरों की उपासना करते है तो यह बहुत लाभदायक है।
  • अगर साढ़ेसाती से बचना है तो अपने दोस्तों व् परिवार के साथ समय बिताये एवं अपने वृद्धजनो का आदर एवं सम्मान करे जिससे शनि महाराज शांत रहेंगे साथ ही अपने गुस्से पर नियंत्रण रखे।
  • सबसे ज्यादा क्रूर ग्रहों मे शनिदेव का नाम जरूर सुनने मे आता है क्योकि जिसकी जिंदगी मे शनिदेव आ जाते है ,उसकी काया पलट हो जाती है लेकिन शनि के अलावा कुछ गृह ऐसे भी है जो आपकी अच्छी खासी जिंदगी मे तूफान मचा सकते है इसलिए कुंडली मे अशुभ ग्रहो का असर बहुत ही बुरा परिणाम देता है।
  • shani shanti के लिए ghode ki naal का भी प्रयोग करे।
  • ghode ki naal ring (छल्ला) भी धारण कर सकते है।

जानिए ..shani dev ki puja kaise kare

Shani shanti Mantra

  • अगर देखा जाये तो आज के इस भाग- दौड़ भरी जिंदगी मे हर किसी के पास पूजा करने का समय नहीं है जा ही किसी पूजा स्थल मे जाने का समय मिलता है Shani shanti बहुत जरुरी है क्योकि हम अपने आप मे बहुत बिजी हो गए है इसलिए हम आपको आज ऐसा मंत्र बताने जा रहे है जिससे जाप से आप अपने क्रूर वक्त से मुक्ति पा सकते है।
  • ज्योतिष विज्ञानं एक ऐसा शास्त्र है जिसमे हर किसी समस्या का समाधान है आज हम आपको माँ दुर्गा का ऐसा मंत्र बताने जा रहे जो आपको पूरी तरह से सुखी एवं समृद्ध बना देगा आपको नियमित रूप से
    माँ दुर्गा मंत्र “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का जाप करना होना ।
  • ज्योतिष विज्ञानं एक ऐसा शास्त्र है जिसमे हर किसी समस्या का समाधान है आज हम आपको माँ दुर्गा का ऐसा मंत्र बताने जा रहे जो आपको पूरी तरह से सुखी एवं समृद्ध बना देगा आपको नियमित रूप से
    माँ दुर्गा मंत्र “ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” का जाप करना होना ।अगर शनि के साथ कोई भी नवग्रह आपकी कुंडली पर बुरा प्रभाव दाल रहा है तो खुद ही शांत हो जायेगा अगर आपकी दिनचर्या मे रोजाना संभव नहीं है तो हफ्ते मे दो दिन मंगलवार और शनिवार को जप जरूर करना चाहिए

Shani Shanti Puja

 

  • शनि पूजा शनि ग्रह को खुश करने के लिए किया जाता है।इस पूजा के माध्यम से शनि ग्रह को शांत किया जाता है पर जहां तक संभव हो, उस स्थिति को समाप्त किया जा सकता है, जिससे उस व्यक्ति को अपने बुरे प्रभाव के नीचे से यह भी कम से कम हानि पहुंचा जा सकता है।
shani pooja
shani shanti
  • शनिदेव को एक दाता और साथ ही विध्वंसक भी कहा जाता है।
  • आम तौर पर शनीदेव को काला,  तलवार, तीर और दो खंड़ों के साथ विराजमान है और जो कि शानि वाहन या वाहक है।
  • शनिदेव का जन्म वैशाख के महीने में हुआ था और इसलिए इस दिन को शनि जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग शनि देव की पूजा करते हैं ताकि वे उन पर शनि के दुष्प्रभावों को कम कर सकें।
  • शनिदेव शांति के लिए Shani yantra का प्रयोग लाभदायक सिद्ध होगा

और पढ़े…..shani dosh nivaran

time to offer Shani puja

  •  ‘शनि जयंती’ वैशाख वदय चतुर्दशी ‘अमावस्या’ पर मनाया जाता है और ऐसा माना जाता है कि इस शुभ दिन भगवान शनी का जन्म हुआ था।
  • बहुत ही शांत तरीके से पूजा की जाती है और सभी संबंधित कर्मकांडों का कड़ाई से पालन किया जाता है। एक शनिवार को पड़ने वाला नया चाँद, इसे शश्वचारी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। एक वर्ष में आमतौर पर दो या तीन शनेश्चर अमावस्या होंगे। अधिकतम संभव लाभ प्राप्त करने के लिए इस दिन शनि देव पूजा की पेशकश करने के लिए महान देखभाल की जाती है।
  • भारतीय चंद्र कैलेंडर के अनुसार शनि के
  • मैं प्रभु सूर्य पर ध्यान करता हूं जो भगवान सूर्य के पुत्र हैं। चलो धीमी गति से चलने वाला भगवान मेरी बुद्धिमत्ता प्रकाशित करता है
  • की शुश्रुषा पर प्रकाश पड़ता है। यह   पूजा के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है क्योंकि यह देवता का पसंदीदा दिन माना जाता है। वह शनिवार का स्वामी है और इसलिए त्रायदाशी शनिवार को गिरता है। यह एक ऐसा दिन है जब भगवान को प्रसन्न करने में कोई कठिनाई नहीं होती और जीवन के नकारात्मक प्रभाव को जन्म देता है।
  • शनि पूजा आमतौर पर एक शनिवार को किया जाता है। इस दिन, भक्त भी सुबह से शाम तक उपवास करता है। सुबह जल्दी उठें और अपने शरीर पर तेल का लेप लगाने के बाद तेल स्नान करें। स्नान के बाद, दिन के लिए काले कपड़े पहनें। पूरे दिन तिल के तेल का उपयोग करें
  • भगवान गणेश की एक छवि ले भगवान शनी देव लोहे की छवि प्राप्त करें: यदि ऐसा संभव नहीं है तो आप पूजा भी कर सकते हैं: यदि यह उपलब्ध न हो तो भी पूजा को नियमित रूप से भगवान शनिदेव की प्रतिमा को मन मे बसाकर सामने बैठकर पूजा करें। भगवन हनुमान की पूजा से भक्त देवताओं के अतिरिक्त और भी अधिक लाभ उठा सकते हैं। शनी भगवान शिव का एक महान भक्त है। शिव की पूजा करने के लिए एक निश्चित रास्ता है कि शनि को खुश करें इसलिए, शिव पूजा को हनुमान और शिव पूजा के साथ मिलाकर ।
  • Shani Gayatri Mantra
    Aum Sanaischaraya Vidmahe Sooryaputraya Dheemahi,
    Tanno Manda Prachodayat.
  • Meaning- मैं प्रभु सूर्य पर ध्यान करता हूं जो भगवान सूर्य के पुत्र हैं। चलो धीमी गति से चलने वाला भगवान मेरी बुद्धिमत्ता प्रकाशित करता है
  • शनीदेव कभी भी गुस्सा नहीं होते , जैसा कि लोगों द्वारा चित्रित किया गया है। भगवान शिव द्वारा सौंपे गए दायित्वों के कारण वह अपने जीवन में कर्म का परिणाम दे सकते हैं। वह केवल अतीत के जीवन में हमारे बुरे कामों के परिणाम ला रहा है। तथापि, उसे खुश करने के कुछ तरीके भी हैं। यदि संभव हो तो, उड़द, तेल, तिल, ऐमेटीस्ट रत्न, काला गाय, भैंस, काला, कपड़ा या जरूरतमंद लोगों को दान करें और साथ ही ब्राह्मण को लोहा दान करें। हो सके तो , ये दान उस दिन करें जब आप शनी पूजा करते हैं शाम को आप शिव देव, हनुमान और शिव मंदिर में पूजा समाप्त करने के लिए संभव हो सकते हैं।