shastya-यदि आप भी फ्रिज में रखते है आटा हो जाइये सावधान, घर में होगा भुत प्रेत का वास !

आज के इस आधुनिक युग में लोग प्राचीन परम्पराओ को बेतुका मान उनसे मुंह मोड़ रह है. आज के लोगो का मानना है की इन परम्पराओ का कोई आधार नहीं है अगर यह परम्परा बनी भी थी तो वह उसी जमाने के लिए अनुकूल थी.

इस आधुनिक युग में प्राचीन मान्यताएं सिर्फ एक बात बन कर रह गई जिसका कोई मतलब नहीं. इनका इस युग में कोई भी उपयोग नहीं यदि कोई व्यक्ति इन मान्यताओं को मान भी रहा है तो वह सिर्फ अपना नुकसान कर रहा है और व्यर्थ की चीज़ो में अपना समय गंवा रहा है.

यदि आप का भी कुछ इसी प्रकार का नजरिया है तो आज हम आपको एक सच से वाकिफ कराएंगे जो आपके नजरिए को बदल देगा.

वास्तव में अनेक प्रकार के शोधों के बाद एवं हमारे प्राचीन मान्यताओं को गहराई से समझने के बाद शोधकर्ताओं ने यह निष्कर्ष दिया है की अक्सर हर हिन्दू मान्यताओं के पीछे एक वैज्ञानिक सन्देश छुपा हुआ है.

हर एक मान्यताओं से जुदा एक वैज्ञानिक कारण है, जिनके बारे में हर कोई नहीं जानता.

यह सत्य है की जब ये मान्यताएं बनी थी उस युग में उन्हें प्रयोग में लाना बहुत ही आसान था तथा यह सही भी था. परन्तु आज के युग में बहुत बदलाव आ चुका है अनेक परिवर्तन हो चुके है.

लेकिन फिर भी मान्यताओं के वैज्ञानिक परिणाम आज भी वैसे के वैसे ही है, उनमे कोई बदलाव नहीं आया है. तथा यदि इन्हे भली भांति समझा जाए तो ये काम में लिए जा सकते है.